गुंजायमान है यह गगन, दिल भी है अब मगन। आओ घुल मिल जाए मन, जागे भारत का हर जन जन। गुंजायमान है यह गगन, दिल भी है अब मगन। आओ घुल मिल जाए मन, जागे भारत का हर जन...
कर लो स्वागत बनकर दुल्हन नयी नवेली। कर लो स्वागत बनकर दुल्हन नयी नवेली।
ये कैसी आज़ादी है ! जहाँ सत्तर साल बाद भी गावों में हमारे, नहीं पहुँच पाया बिजली और पानी है ? ये कैसी आज़ादी है ! जहाँ सत्तर साल बाद भी गावों में हमारे, नहीं पहुँच पाया...
केवल हैं ये सैनिक नहीं, वीरों के भी वीर हैं ये। रण के मध्य न रोक सकोगे, गांडीव से निकल केवल हैं ये सैनिक नहीं, वीरों के भी वीर हैं ये। रण के मध्य न रोक सकोगे, गांडी...
पद्मनी के जौहर से निकला मैं निडर निर्भीक राजपूत हूं। पद्मनी के जौहर से निकला मैं निडर निर्भीक राजपूत हूं।
इन सामाजिक बोझों के जो आया तू अधीन , अस्तित्व खुद का लिया तूने खुद से ही छीन। इन सामाजिक बोझों के जो आया तू अधीन , अस्तित्व खुद का लिया तूने खुद से ही छीन।